ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सत्ता से बेदखली के दौरान अपनी हत्या की साजिश रचे जाने का गंभीर आरोप लगाया है। हसीना ने दावा किया कि उन्हें और उनकी छोटी बहन शेख रेहाना को मारने की साजिश की गई थी, लेकिन वे बाल-बाल बच गईं। यह बयान उन्होंने शुक्रवार रात बांग्लादेश अवामी लीग पार्टी के फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए अपने ऑडियो भाषण में दिया।
मारने की साजिश से बाल-बाल बची हसीना और उनकी बहन
हसीना ने कहा, “मैं और मेरी बहन रेहाना महज 20-25 मिनट के अंतर से बच सके। हमारी जान बच गई, लेकिन यह केवल अल्लाह की कृपा से ही संभव हुआ।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी हत्या की साजिशें कई बार रची गईं। हसीना ने कहा, “मैंने महसूस किया कि 21 अगस्त को मुझे मारने की साजिश का सामना करना पड़ा और कोटलीपारा में बम से बच जाना भी अल्लाह की मर्जी थी।”
अगस्त 2004 की घटना और बम धमाके की साजिश
21 अगस्त 2004 को बांग्लादेश में एक आतंकवाद विरोधी रैली के दौरान ग्रेनेड ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 24 लोगों की मौत हो गई और 500 से अधिक लोग घायल हो गए थे। उस समय शेख हसीना रैली को संबोधित कर रही थीं और यह धमाका उनके पास हुआ था। हालांकि, हसीना को कुछ चोटें आईं, लेकिन उनकी जान बच गई।
कोटलीपारा बम धमाका और शेख हसीना की सुरक्षा
इसके अलावा, शेख हसीना ने कोटलीपारा बम धमाके का भी जिक्र किया, जिसे उनकी हत्या की साजिश के तहत तैयार किया गया था। 21 जुलाई 2000 को 76 किलोग्राम का बम बरामद हुआ था, और दो दिन बाद कोटालीपारा के शेख लुत्फोर रहमान आइडियल कॉलेज में एक और बम पाया गया था, जहां शेख हसीना को 22 जुलाई 2000 को रैली संबोधित करनी थी।
हसीना का मानना है कि अल्लाह की कृपा से ही वे बची हैं
हसीना ने अपनी जान को बचाने का श्रेय अल्लाह को देते हुए कहा, “यह अल्लाह की मर्जी थी कि मैं आज भी जीवित हूं। मुझे लगता है कि मुझे कुछ और करना है, हालांकि मैं अभी भी अपनी मातृभूमि और अपने घर से दूर हूं। सब कुछ जल चुका है, लेकिन मैं अभी भी जीवित हूं।”